छाया
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प्रकाश सजता है, मार्मिकता से,
ध्वनि है खोखली, आत्मा भी खोखली,
पत्थर-सा शरीर, मृत्यु का आश्वासन लिए।
क्षण है दुर्लभ,
पर अवसर है शाश्वत।
छाया को ध्यान से देखो,
बाहर की ओर दृष्टि डालो — मृत्यु तो निश्चित है।
फिर भी
एक उष्ण, निकटता-भरा स्पर्श आता है,
पूर्ण और अखंड।
आत्मा फिर से नवजीवन पाती है,
मृत्यु पीछे छूट जाती है,
और सब कुछ मिल जाता है
शाश्वत एकता में।
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