एक सरल समय, न कि अभाव के कारण, मोमबत्ती थामो, भय मत करो, अंधकार बुलाता है, पुकार सुनो, यहाँ कोई प्रतीक्षा करता हुआ रूप है। पूर्णतः प्रकाशित,
सुशोभित पत्थर—कठोर, जड़, दृष्टि भ्रमित, मन रहा अचेत। स्थिर है जैसे नभ में बादल, पर भीतर शून्य, न जीवन-रेख। सब कुछ क्रम में, त्रुटि न
प्रकाश सजता है, मार्मिकता से, ध्वनि है खोखली, आत्मा भी खोखली, पत्थर-सा शरीर, मृत्यु का आश्वासन लिए। क्षण है दुर्लभ, पर अवसर है शाश्वत। छाया को ध्
दिन, पहले जैसे कई, पेड़ हिलते, पत्ते झड़ते, सपने झुक जाते, भीड़ की मर्ज़ी के आगे; क़ीमत बस एक। दृष्टि तंग, सत्य से अंधे, ठहराव में, मृत्यु का राज, सपने
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